Tuesday, August 19, 2014

झलक बाबा के कहनवा माने के पड़ी (संस्मरण)

हं हं... इहे गीत रहे जवन एगो इयाद बनी के रह गईल बा | आ एह इयाद में ढेर लोग जुडल बा | केकरा के गिनी केकरा के छोड़ीं !?पता ना इ गाना केकर गावल ह, आ केकरा मुंहे सुनले रहीं | उमिर के हिसाब से ५-६ साल से अधिका ना होखब | आ एह गीत के लयिकायीं में खूब गावत रहीं | आ एह गीत के फरमायिसी आवत रहे "बिस्नाथ" बाबा से...

बबुआ , झलक बाबा के सुनाव |
बाबा के नाव खेयाल ना रहत रहे , त हम आपन बाबा से पुछब- उ झलक बाबा कहिया अयिहें ? 


तीन पुसुत ऊपर एगो बाबा बक्सर के भीरी भदवर बस गईले | बिस्नाथ बाबा उहे भदवर से रहलें | उनका में आ हमार बाबा में ढेर परेम | आ उ दुनो जाना के भ्रात परेम के नेह जोग में खेलल हमार लयिकायीं | आयुर्वेद आ संस्कृत में डिक्शनरी के निघंटु कहल जाला | हमार पुकार के नाव इहे रखायिल रहे, बाकी "नि" के निस्तारण कर दियायिल आ घंटू परसिद्ध भ गईल | अब बिस्नाथ बाबा जब जब हमार गाँव पवना आवस| दुवार पे चौकी पे बिछौना, तकिया के साथे गोड धोये के जिम्मेवारी हमरा के | आ हमहूँ लपक के इ काम के झटपट करीं की बाबा आईल बानी जरुर कुछ भेंटाई | 
कहिहें- ए चनरभूसन भाई , नाती ( हमनी किहाँ पोता-नाती एके कहाला) ढेर काम करत बा | एकरा के खीरमोहन खियाव |बबुआ घंटू जी, झलक बाबा सुनायिब त खीरमोहन भेंटाई | अब खीरमोहन के लालच पे बाबा हमरा से झलक बाबा के गीत सुनब |

"झलक बाबा के कहनवा माने के पड़ी
माने ले पड़ी हो धन्वा माने के पड़ी 
झलक बाबा के कह्नवा..... |" 
फेर झोरा में से खीरमोहन के ठोंगा निकसी, दुनो हाथ में एकेक गो भेंटाई | 

बिस्नाथ बाबा गुजर गईलें , चनरभूसन बाबा गुजर गईले |
गाँव के दुआर ढह गईल |
हमार लयिकायीं ओही दुआर के माटी के ढूह में भुलाईल बा |

लयिकायीं के एह इयाद में सांच मनई के सुनर मुनर रूप अब भुला रहल बा | बाकी मनवा के कवनो कोर पे कबो कबो अतना बेचैनी होला, की हे मन, लवट चलs... ओही लायिकायीं के कोरा में जहाँ ना सांच रहे ना झूठ | बस एगो झलक बाबा रहन, एगो उनकर गीत रहे आ बलिराम हलुआई के खीरमोहन रहे...
___शशि रंजन मिश्र (२४/०२/२०१४)

Thursday, February 17, 2011

चेहरा बेईमान के...


(महँगाई के मार से घवाहिल जनता के भोजपुरी साहित्य के सृंगार कईसे सुनायीं ? देश के एह दशा देख के कलम भी मुस्मात लेखा लोर ढा रहल बिया... केकर करनी, केकर भरनी | पढ़ीं आ आपन कपार धुनी...कवि प्रदीप के गीत "आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ.." के तर्ज पर)

आव बबुआ तोहरा देखाईं चेहरा सब बेईमान के

घोर के पियत लाज शरम, देख सब हैवान के

कहाँ बा शरम, कहाँ बा शरम...


इ देख स्विस बैंक के खाता, करिया नोट से भरल बा

उज्जर उज्जर कपड़ावालन के इ करनी करल बा

चारा-हवाला-बोफोर्स-आदर्श, सबके एहिजा खाता बा

आंखी के सोझा देश के पईसा, एहिजे सब लपाता बा

देश के देह में घुन बनल, करनी सब शैतान के

घोर के पियत लाज शरम, देख सब हैवान के

कहाँ बा शरम, कहाँ बा शरम...


इ देख राष्ट्रमंडल के खेला, कलमाड़ी आ चेला के

सत्तर हजार करोड फूँकाइल, ना बाचल अधेला के

भईल छिछालेदर दुनिया में, रंगत अईसन मेला के

पीठ थपथपावत आपन देख, इज्जत डूबइला के

नाम हंसाई करवा देहले, इ भारत महान के

लाज शरम घोर के पियत देख सब हैवान के

कहाँ बा शरम, कहाँ बा शरम...


राजा के भी राज अजीब बा, हर हाथे मोबाईल बा

सस्ता भईल अब बात करल, एही में अझुरायिल बा

दूरसंचार के मायाजाल अनोखा, लमहर घोटाला बा

जेने देख ओने टू-एस टू-जी के बोलबाला बा

कईसन राज चलवलस देख राडिया सुल्तान के

लाज शरम घोर के पियत देख सब हैवान के

कहाँ बा शरम, कहाँ बा शरम...


देख जनता भुलायिल नईखे, उ चारा घोटाला के

आदमी कईसे खा गईल देख, जानवर के निवाला के

कबो कबो अबहुओं उठत बा धुंआ, करिया हवाला के

कईसन दिवाली मनत बाटे देश के दिवाला के

आँख मुंद के सभे भुला जा, सब करनी भगवान के

लाज शरम घोर के पियत देख सब हैवान के

कहाँ बा शरम, कहाँ बा शरम...

~शशि रंजन मिश्र

Wednesday, September 8, 2010

केतना पानी, घो घो रानी...




केतना पानी, घो घो रानी |
जरत जिनगी,
बिलमत आस
देव धरम पे टूटल
विश्वास
काहे के भोला
अवघड़  दानी |
केतना पानी घो घो रानी...

भूखे मरल
करिमना के माई
पड़ल बेराम
ना भईल दवाई
कफ़न के खर्चा में
भईल खींचातानी |
केतना पानी घो घो रानी...

गोबर पाथत
मुस्मात बुधिया
शादी जुकुत
भईल रधिया
अब त शायद
करे पड़े देह नीलामी |
केतना पानी घो घो रानी...

चनर पांडे
बनले मुखिया
सीधा साधा
गरीब दुखिया
दशा बदलल त
करत बाड़े मनमानी |
केतना पानी घो घो रानी ...

शुकुल महतो के
लईका पियक्कड
रामदीन भर जिनगी के
फक्कड
उदास रहेला
चूल्हा सानी |
केतना पानी घो घो रानी...

मड़ई जादो के
मड़ई टूटल
एक कोना में
हडिया फूटल
कर्जा खाके दे देले
जमीन के कुर्बानी |
केतना पानी घो घो रानी ...