Saturday, October 3, 2015

मठाधीशी

भोजपुरी मैया !
ना रे भैया ।

नेता नेतौअल !?
हाँ हो भैया ।

मठाधीशी !!! 
हाँ रे भाई ।

उ त 
जन जागरण से आई !!!

~शशि (०३.१०.२०१५)

Monday, September 28, 2015

मठाधीश सपनेहु सुख नाहीं




ए मठाधीश ! 
का मठाधीश !!? 
तुहूँ आ हमहूँ 
बानी जा भोजपुरिया 
उठवले रहीं झण्डा 
उखाड़ दीं जा किला 
हिला दीं जा संसद 
दिने दुपहरिया 

हाँ हाँ ... 
ठीके कहनी 
मठाधीश तक ले ठीक बा 
नेता बने में बुझाता 
हमरा डाउट

काहे !??? 

मठाधीश रहनी 
त चादर गुलदस्ता पईनी
नेता बनब त हो जाई 
ई कुल आउट

भाग मरदे !!! 

नेता बनके लोगन के 
बुरबक बनावल जायी 
लोगन के जगावे के नावें 
आन्ही-थोपी खेलावल जायी 
घुमल जायी गांवे- गाँव 
निमन चबूतरा पे लिहल 
जायी ठाँव 
बोले के मौका 
माइक पे मिली 
बड़का फरेम में फोटो खिंचाई 
मुखड़ा के चौखट खिली 
बुड़बकाही मत बतियाव !
मठाधीशी जिंदाबाद 
अब नेता बन के 
बात पगुराव

त ए मठाधीश ! 
का मठाधीश !!? 
तुहूँ आ हमहूँ 
बानी जा भोजपुरिया 
पहिराईं जा टोपी 
बजाईं जा फोंफी 
बांटी जा गेयान 
कि 
मेरा भारत महान !!!

Saturday, August 1, 2015

भोला बाबा, रवा ठीक बानी नू !?

साभार-श्रीन्यूज डॉट कॉम

हे भोला बाबा ! आज से सावन शुरू बा, भदइया बेंग लेखा राउर भगत लोग के जमात पैदा हो गइल बा । रवा गंजेड़ी भंगेड़ी रहीं की ना अब के जाने बाकी भगत लोग राउरे नावें आपन मन के मतवाला जरूर बनाई । 
अब कुछ भगत लोग अपना के भोला के सेना कहेला लोग । अब सेना चली , त अस्त्र शस्त्र चहबे करी... त ए बाबा, रउरा त्रिशूले भांजी... भगत लोग हॉकी सटीक , तमंचा, गुप्ती , तलवार भाला सब से लैस बा । अब चुनावी टिकट से पहिले नेता लोग आपन शक्ति प्रदर्शन करे ला, ओइसही ई भगत लोग अपना के एक दोसरा से जब्बर देखाई। अब रवा के चिन्हे के बा की कवन भगत बरियार बा ।

कुछ भोजपुरिया भगत लोग जे साल भ लहंगा रिमोट चोली कुर्ती के बटन में आपन सुर ताल के अझुरईले रहे, उहे सुरताल पे राउर भजन गा के औघड़ बन जायी लोग । अब रावा लोलिपोप के धुन पे तांडव जनी करब। कमर दोमे भर के काम बा ।

मौसम भी दोरस करत बा, कभी बरखा बुनी त कभी पसीना से चुनचुनी । आ ओपे सेकेंड सेकेंड पे पानी उझिलात। बाबा रवा बड़ा फेरा में पड़ल बानी... पानी में बोथईला से सर्दी बोखार आ देह में दरद नईखे नू ? होइबो करी त के देखेवाला बा ? कराहत होखब त बम बम के आवाज में भला के सुनो... जाये दीं ए बाबा ! होत फजीराहे एक पाता कालपोल आ सिट्रीजिन चढ़ाईब । निमुस्लाइड बैन बा, बाकी एहिजा खूब मिलेला । अब जान बुझ के गलत दवाई ना चढ़ाईब । लहसुन त खाईं ना ? ना त एकपोटिया लहसुन के चाय मे खौला के पियति त आराम मिलित । एक पाकिट बाबा रामदेव वाला दिव्य पेय चढ़ाईब, आपन मलकिनी से काढ़ा अवंटवा लेब । भोरे भेंट करब, तब ले बम बम