Sunday, November 2, 2014

अक्षय नवमी के कथा


फोटो: दृकपंचांग.कॉम 

अरे महाराज दम धरीं... कथवा त कहबे करब...
बाकी बिना पान सोपाड़ी आ दक्षिणा लेले इ मिसिर बाबा के पोथी के पन्ना ना पलटाई ।
कम से कम ग्यारह रोपेया इ पोथिया  पे चढ़ाईं त हमहूँ आगे बढीं ।
का कहत बानी... पान आ सोपाड़ी नईखे...  अरे भेजीं इ महँगुआ के ... रामचनर पटेहरी के दोकान कवन कोस भ पे बा, भाग के जाई आ दउर के आई । 
तब ले कथा के भाव सुनी.. मेन कथवा हम बाद में कहेंगे...
ए बाबू साहेब जानत बानी, सभे बरत-त्यौहार एक के पीछे एक... आ सब एक दोसरा पे डिपेंडेंट.

अरे चिहात काहे बानी ! डिपेंडेंट ना बुझनी ह की हमार बतिया ना बुझाइल ह ?
अच्छा-अच्छा ,   अंग्रेजी बुझिला !!!
हँ, त कहत रहीं... सभे बरत एक दोसरा पे निर्भर बा ।
सोहराई बितल त गोधन आइल... दिवाली के बांचल लड्डू मिठाई एह गोधन में निपटारा हो गइल... त हमार कहलका ठीक बा की ना?
फेर आइल छठ...
आरे हँ ... रउआ घरे त भइल रहल हा... ठेकुआ आ कचवनिया त बनले होखी । काहे ना दू-चार ठेकुआ कचवनिया सीधा खातिर बान्ह लेनी ह ...
लीं हई मंगरूओ आ गइल... पान सोपाड़ी साथे ।
त कहत रहीं छठ के बाद इ अक्षय नवमी के अयिला के ।
कथा शुरू करत बानी... इ लीं हाथ में फूल ,पान, सोपाड़ी... कुछ दरबो दक्छिना निकाल लीं । 
आँख तोपिके ध्यान करीं ....

ओम बिसनु.. बिसनु बिसनु.... अमुक गावें , अमुक नावें, अमुक गोतर अमुक पितर... पधारीं । एह आंवरा के फेड के नीचे हमरा संगे अक्षय नवमी बाबा के कथा सुनी । 
हाथ के सभे चीज नीचे राखीं... आ हाथ जोड़ीं ।
परेम से बोलीं बिसनु भगवान की जय ।
 त कथा बा-
एकदा नैमिशारण्ये....... प्रणमामि शम्भो।।
ना बुझाइल त हिंदी में अरथ सुनीं-
एक बेर ... निमिषा के जंगल में इकट्ठा भइल...
 अरे ! घुमे फिरे... आ आपन पोसुआ सवरीयन के जंगल के हवा खियावे । इनर महाराज के हाथी सरग में बयिठल बयिठल पगलात रहे... भोला बाबा के बैल के हरियरी चाहत रहे... त मय देवता जंगल ओरे चलले... कि चल ए मन, ढेर भयिल रम्भा-मेनका सुनरी लोग के नाच... सरग में खा- पिअ आ दिनभर बईठ के नाच देखला से देह के दुर्दशा भइल जात बा... गणेश बाबा के कोलेस्ट्रोल बढ़ल बा... तोंद नईखे कम होत... जंगल के हरियरी के हवा लागी त मन-मिजाज हरियर हो जाई ।  
अब जंगल में डेरा डलाइल आ बयिठकी  लागल त एक जाना ब्रह्मा बाबा से कहले-
की ए बाबा, सोहराई बित गइल... लक्ष्मी जी के पूजा मिलल... गणेश बाबा के लड्डू भेंटायिल... अभि ले पाचल नईखे... डेकार मारत बाड़े... गोधनो कुटायिल, आ छठो बीत गइल... माने एह साल के कोटा पूरा हो गइल... अब हमनी के कवन पूजा भेंटाई जवना से हमनी के जाड़ा कटो ...
 ब्रह्मा जी कहले- 
अरे जाड़ा में नाक ना बहे आ देह में कैल्सियम के कमी ना होखे एह से आंवरा खाए के चाहीं । एह से अईसन बरत बतावत बानी, जवना से हमनी के जाड़ा में पूजा चढ़ी आ हमनी के जाड़ा कटी ।
एक बेर लक्ष्मी जी घुमे निकलली... हँ, उहे दिवाली के बाद...
सोचली की हमार पूजा त हो गइल, बाकी हमार मरद के पूजा त भयिबे ना कइल ... आ एने गउरा  बहिनो के पूजा भइल बाकी भोला बाबा छूंछे रह गईले ।
हे मन... का करीं !!! हमहीं पूजा कर देत बानी । बाकी भोला बाबा के हम पूजा करीं आ गउरा  बहिन खिसिया जास त बड़ फेरा बा ।
ध्यान लगयिली ... त आंवला के फल लउकल.. कहली की इ धात्री फल में त तुलसी आ बेल दुनो के गुण बा । एकरे के पूजा करब त दुनो जाना के पूजा हो जाई आ गउरा  बहिन खिसियइबो ना करिहें ।
त लक्ष्मी जी ओही आंवलवा के बिसनु आ शिव के प्रतिक बना के पूजा कर देली । 
सत्येंदर उपाध्याय जी के अक्षय नवमी पूजा 
दुनो जाना प्रसन्न भईले । आके कहले- ए लक्ष्मी, जईसे तू आज हमनी के पूजा कयिलू ओहसे तहरा अभी कमी ना होखेवाला पुन्य मिलल । एह पुन्य के क्षय ना होई । 
दुनो जाना आशीर्वाद दे घरे गइले ।
ब्रह्मा बाबा कहले इहे पूजा इ पृथ्वी पे जे करी ओकरा ओइसहीं अक्षय पुन्य मिली ।
लीं ये जजिमान इहे कथा त रहल ह ...
बोलीं बिसनु भगवान की जै .... भोले बैजनाथ की जै
अब निकालीं कुछो खाए पिए के..  एह आंवरा के फेड़ के निचे कुछ खा के हमहूँ पुन्न कमाँ लीं । आरे छठ के बांचल ठेकुआ- कचवनिए खियायीं । कहबे कईनी ह पहिलहीं कि इ नवमीछठ पे डिपेंडेंट बा ... 
अच्छा त आंवरा के अचार लायिल बानी... दिहीं, सुखलो आंवरा के खाए के महातम बा ।
स्कन (द) पुराण में लिखल बा...
आरे ना सकरकन पुराण ना... स्कन्द पुराण के कातिक महातम में बा की जे सुखलो  आंवरा खायी उ नारायण हो जाई -   
'धात्री फल विलिप्तातांगो धात्री फल विभूषित:। धात्री फल कृताहारो नरो नारायणो भवेत।।'
त एगो ठेकुआ आउर बढायीं... ब्राह्मण के मुख ब्रह्मा के होला.. नारायण त रहबे करेले... ढेर आशिर्बाद बा । अयिसहीं सालों साल ठेकुआ कचवनिया खियायीं ।
आबाद रहीं...
बोलीं बिसनु भगवान की जै...



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